जानवरों के इलाज के नाम पर घोटाला, चिड़ियाघर में पहुंचे बिल पर दवाएं नहीं

नई दिल्ली 
दिल्ली के चिड़ियाघर में दवा घोटाले के आरोप लगे हैं। पता लगा है कि जानवरों के इलाज के नाम पर दवाइयों की खरीद में गड़बड़ी हुई। कई दवाओं को मार्केट रेट से लगभग दोगुनी कीमत पर खरीदा गया। कुछ दवाइयां सिर्फ कागजों में खरीदी गईं। यानी उनके बिल जमा कराए गए, लेकिन वह कभी चिड़ियाघर के मेडिसिन स्टोर में नहीं आईं। 
जू डायरेक्टर रेनू सिंह ने बताया कि इस तरह की शिकायत मिली है, उसकी जांच कराई जा रही है। दवाइयों की खरीद और रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही सचाई का पता लगेगा कि आखिर गड़बड़ी कहां और कैसे हुई? रिपोर्ट आने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह भी पता लगा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पर्यावरण मंत्रालय और बाकी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को भी इस बारे में शिकायत की गई है। पता लगा है कि 25 अप्रैल को दिल्ली चिड़ियाघर के मेडिसिन डिपार्टमेंट में 62 हजार 160 रुपये के बिल नंबर-155 की एंट्री हुई। स्टोर रूम में उस दवाई का पता लगाया गया कि क्या वह वहां रखी है या नहीं। 

बताया जाता है कि जब रिकॉर्ड चेक किए गए तो दवाई वहां नहीं मिली। स्टोरकीपर ने भी बताया है कि इस बिल नंबर की दवाई उसे कभी नहीं मिली लेकिन दवा की एंट्री रजिस्टर में हुई है। इसी तरह कई दवाइयों की फर्जी एंट्री रजिस्टर में मिलने की बात बताई गई है। इसके अलावा पिछले साल अक्टूबर में एक और दवाई की खरीद में गड़बड़ी की बात पकड़ी गई है। बताया जाता है कि जिस दवा की कीमत मार्केट में 10 हजार रुपये थी। उसे 18 हजार 500 रुपये में खरीदा गया। 

नहीं फॉलो हुई गाइडलाइन 
चिड़ियाघर में दवाइयां खरीदने के लिए एक गाइडलाइन है। इसमें 15 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक की कोई दवा खरीदी जाती है, तो वह तीन सदस्यों की कमिटी से रिकमंड होने के बाद ही ली जाती है, वह भी टेंडर के जरिए। आरोप है कि इन दवाइयों की खरीद में किसी भी नियम का पालन नहीं हुआ। पता लगा है कि अधिकतर दवाइयां एक ही कंपनी से खरीदी गईं। उन दवाओं को खरीदने की जानकारी भी मिली है, जिनकी जरूरत तब नहीं थी। 

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